सफ़र करना और लिखना अच्छा लगता है!
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Thursday, 28 December 2017
ना जाने क्यूँ जिंदा है जिंदगी
ना जाने क्यूँ जिंदा है जिंदगी
इंसान तो कोई जिंदा नहीं
सब कुछ तो कर के देख लिया
कोई पर यहाँ शर्मिंदा नहीं
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