Showing posts with label कविता. Show all posts
Showing posts with label कविता. Show all posts

Thursday, 28 December 2017

ना जाने क्यूँ जिंदा है जिंदगी

ना जाने क्यूँ जिंदा है जिंदगी
इंसान तो कोई जिंदा नहीं
सब कुछ तो कर के देख लिया
कोई पर यहाँ शर्मिंदा नहीं