हमारे देश में राजकुमार और राजकुमारी आये थे, अखबारों को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे हम आज भी गुलाम हैं, अपना अपना नजरिया हो सकता है|
खैर मैंने अख़बारों की आलोचना के लिए ये लेख नहीं लिखा मैंने ये सिर्फ अपनी तसल्ली के लिए लिखा है, जब वो यहाँ थे तो मैंने ये इसलिए नहीं लिखा कहीं वो अपने पुराने अवतार में न आ जाएँ और मुझे काला पानी भेज दें, वैसे सुना है आजकल हमने वहां बड़े सुन्दर पार्क बना दिए हैं
हम शायद पाकिस्तान को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानते हैं, पर जो अंग्रेज 200 साल तक खाल उतारते रहे उनके लिए हमारे दिल में एक अलग जगह है, चाहे वो ब्रिटेन जाकर पढना हो नौकरी करना हो या फिर उनके यहाँ से आये हुए लोगों को पलकों पर बैठने का खासकर राजघराने से आये लोगों को|
अरे हाँ कुछ विशेष शब्द हैं duke and duchess मने शासक और रानी, ये तो अख़बारों में पढ़ते ही मजा आ जाता है अंग्रेजी के खासकर| अब उनको भी ऐसे शब्द लिखने का मौका कम ही मिलता होगा न गलती से हमारे पुरखों ने आजादी दिलवा दी नहीं तो हम भी duke and duchess के शासन में पल रहे होते और अख़बार ये शब्द बार बार इस्तेमाल कर पाते|
भावी महाराज और महारानी काजीरंगा के वन में सैर सपाटे के लिए गए क्यूंकि अब वो लोग सैर सपाटा करने लगे हैं,क्यूंकि शिकार करने को आजकल वो लोग मानव मूल्यों के विरुद्ध मानने लगे हैं, कहीं पढ़ा था उनके दादा जी फिलिप ने भारत की सैर पर शेर कर शिकार किया था दुर्लभ कैमरों के समय फोटो भी प्रकाशित की गयी थी| मेरा मन हुआ उनको कोई काला पानी की सैर करने को बोले जरा देख तो लें उनके पुरखों ने कितने जख्म दिए है या फिर बस ये तय कर लेने से कि अब वो लोग जख्म नहीं देंगे से प्रायश्चित हो गया| एक गजब बात भी हुई कुछ शिकारी लोगों को लगा हमारे पुराने दिन वापस आ गए हैं उन्होंने उसी काजीरंगा में एक गैंडे को AK47 से मार दिया|
एक फोटो देखकर मेरा मन प्रसन्न हुआ जब भारत के प्रधानमंत्री ने तथाकथित राजकुमार साहब से हाथ मिलाये और उनका हाथ सफ़ेद हो गया, मैं सोच रहा था प्रधानमंत्री साहब का का मन तो हुआ होगा कि पूछ लें जो वो सेना की ट्रेनिंग वगरह की अफवाहें फैलाते हैं उसमे दम कितना है, इतना भी क्या नाजुक हुए राजकुमार जी|
उन्होंने सचिन और वेंगसकर के साथ क्रिकेट खेली, हाथी और गैंडे के बच्चे को दूध भी पिलाया, फिर बच्चों का नृत्य देखा, हम लोगों ने पढ़ा है मेहमान भगवान् होता है फिर वो तो हमारे घोषित भगवान् रह चुके हैं अच्छे से खातिर की उनकी|
मेरा ये लेख उनके यहाँ रहते हुए उनको मिल जाता तो बड़ी शर्मिंदगी उठानी पड़ती बेचारों को, शायद इसलिए मैंने हिंदी में लिखा फिर बताया भी नहीं के लिख लिया है (हा हा)
अंग्रेजी अच्छी भाषा है उसमे मात्रा भी नहीं होती अगर मैं बोल या लिख पाता तो जरुर उनको ये भेजता
जिंदाबाद जिंदाबाद
भारत माता की जय
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